देर क्रिटेशियस, लगभग 10 से 7 करोड़ वर्ष पहले, दक्षिणी टेथिस के उथले गर्म लैगून में मेडागास्कर या भारतीय प्लेट के पास फैला यह दृश्य आज के प्रवाल-भित्तियों जैसा नहीं, बल्कि रडिस्ट द्विपटली जीवों के “रीफ़” से बना संसार दिखाता है। यहाँ क्रीम और धूसर रंग के 1 मीटर तक ऊँचे Hippurites और Radiolites घने झुरमुटों में खड़े हैं, जिनके बीच Actinastrea और Thamnasteria जैसे औपनिवेशिक प्रवाल, छोटी चाँदी-सी टेलिओस्ट मछलियाँ और लाल-भूरे Mecochirus लॉब्स्टर धूप से झिलमिलाते कार्बोनेट तल पर घूमते हैं। यह कम-ऊर्जा वाला चूना-मिट्टी और जीवाश्मी टुकड़ों से बना समुद्री मंच उस ग्रीनहाउस युग का प्रमाण है, जब समुद्र गर्म थे, गोंडवाना टूट रहा था, और दक्षिणी गोलार्ध के उष्ण सागरों में रडिस्ट जीव आधुनिक रीफ़-निर्माताओं की जगह प्रमुख पारितंत्र अभियंता बने हुए थे।
आज के चिली के तट से दूर, लगभग 7 से 6.6 करोड़ वर्ष पहले के अंतिम क्रिटेशस समुद्र में, 10 मीटर से अधिक लंबा मोसासौर Kaikaifilu hervei गहरे नीले-हरे पानी से बिजली-सी तेजी से ऊपर झपटता दिखता है। उसकी गहरी पीठ, हल्का क्रीमी पेट, शक्तिशाली चप्पूनुमा अंग और दाँतेदार लंबी जबड़े उसे Enchodus मछलियों के बिखरते झुंड और अजीब पेपरक्लिप-आकृति वाले अमोनाइट Diplomoceras पर घातक बढ़त देते हैं। यह दृश्य दक्षिणी एंडीज़ के सक्रिय सबडक्शन तट के पास एक अपतटीय ढलान का है, जहाँ कीचड़, शंख-परतें, ज्वालामुखीय राख-जैसे कण और ठंडे-समशीतोष्ण जल उस प्राचीन दक्षिणी प्रशांत पारितंत्र की याद दिलाते हैं।
लगभग 7 से 6.6 करोड़ वर्ष पहले, अंतिम क्रिटेशस के मास्ट्रिख्टियन काल में अंटार्कटिक प्रायद्वीप के जेम्स रॉस बेसिन की ठंडी, हरी-धूसर समुद्री जलराशि में लगभग 6 मीटर लंबा प्लेसियोसौर Morturneria seymourensis अपनी चौड़ी, चपटी थूथन और अनेक छोटे दाँतों वाले सिर के साथ शिकार की तलाश में तैरता दिखाई देता है। उसके चारों ओर पसलीदार Maorites और अधिक चिकने Gaudryceras अमोनाइटों के झुंड मंडरा रहे हैं, जिनमें कुछ के मुलायम शरीर खोल के मुहाने पर झलकते हैं, जबकि ऊपर मंद ध्रुवीय सूर्य का प्रकाश बर्फ-रहित समुद्र पर धुंधला छनता है। यह दृश्य याद दिलाता है कि डायनासोर युग के बिलकुल अंत में भी अंटार्कटिका कोई जमी हुई वीरानी नहीं, बल्कि उत्पादक, उच्च-अक्षांशीय समुद्री पारितंत्र था, जहाँ एलास्मोसॉरिड सरीसृप और अमोनाइट गोंडवाना के विखंडित होते दक्षिणी महासागरों में साथ-साथ फल-फूल रहे थे।
लगभग 7–7.2 करोड़ वर्ष पहले, उत्तर-क्रिटेशियस काल की पाटागोनिया की इस तपती बाढ़भूमि पर कवचधारी टाइटैनोसॉर **साल्टासॉरस** के झुंड उथली, कीचड़भरी बहुधारावाही नदी के किनारे फर्न, साइकैड और अराउकारिया-जैसे शंकुधारियों के बीच चरते दिखाई देते। इनके लगभग 12 मीटर लंबे, भारी शरीर, आगे की ओर उठी गर्दन और त्वचा में जड़े कंकरी-जैसे ऑस्टियोडर्म इन्हें अन्य सॉरोपोडों से अलग पहचान देते हैं। यह दृश्य अर्जेंटीना के **न्यूक्वेन बेसिन** की लाल बलुआ-पत्थरी, सिल्ट और कीचड़ से बनी मौसमी शुष्क नदी-प्रणालियों का प्रतिनिधित्व करता है—उस समय जब गोंडवाना टूट रहा था और दक्षिण अमेरिका के पश्चिमी किनारे पर आरंभिक एंडीय ज्वालामुखीय गतिविधि दूर क्षितिज पर धूल और राख बिखेर रही थी।
देर क्रेटेशियस के मास्ट्रिख्टियन काल, लगभग 7.2–6.9 करोड़ वर्ष पहले, अर्जेंटीना की पटागोनिया स्थित न्युक्वेन बेसिन की अर्ध-शुष्क बाढ़भूमि पर एक वयस्क कार्नोटॉरस सास्त्रेई धूलभरी, फटी हुई कीचड़-समतल भूमि पर संध्या के सुनहरे प्रकाश में आगे बढ़ता दिखाई देता है। इसकी आँखों के ऊपर उभरे मोटे सींग, अत्यंत छोटे अग्रभुज, गहरी छाती, लंबी पूँछ और कंकरीली, शल्कदार त्वचा इसे एबेलिसॉरिड शिकारी डायनासोरों का विशिष्ट प्रतिनिधि बनाते हैं। क्षितिज पर दूर दिखते किशोर टाइटेनोसॉर इस दक्षिणी गोंडवाना के पारिस्थितिक तंत्र की झलक देते हैं, जहाँ सूखी नदीय ओवरबैंक मिट्टियाँ, महीन बालू के टीले, कैल्क्रीट कंकड़ और विरल कॉनिफ़र झाड़ियाँ मिलकर उस प्राचीन संसार का दृश्य रचते हैं। यह दृश्य हमें उस समय में ले जाता है जब दक्षिण अमेरिका के भूभाग पर एबेलिसॉरिड और टाइटेनोसॉर प्रभुत्व रखते थे, ठीक उस युग के अंत से पहले जब डायनासोरों का स्वर्णकाल समाप्त होने वाला था।
लगभग 6.6 करोड़ वर्ष पहले, क्रिटेशियस काल के बिलकुल अंत में, भारत के बहते हुए द्वीपीय महाद्वीप पर डेक्कन ट्रैप्स की ताज़ी काली बेसाल्टिक लावा-धाराएँ फर्नों से घिरे बाढ़-मैदान पर फैल रही थीं, जबकि राख तालाबों, जले हुए वृक्ष-तनों और धुआँ छोड़ती दरारों पर जम रही थी। मध्य दूरी में दिखाई देते इसिसॉरस (Isisaurus)—एक टाइटैनोसॉर सॉरोपोड—अपनी लंबी गर्दन, छोटे सिर और स्तंभ जैसे पैरों के साथ इस ज्वालामुखीय संकट के बीच सावधानी से आगे बढ़ते हैं। सीढ़ीनुमा बेसाल्ट की परतें, राख से धुँधला तांबे-लाल सूर्योदय और दूर फूटती लावा-फुहारें उस समय की याद दिलाती हैं जब विशाल ज्वालामुखीय उद्गारों ने पारिस्थितिक तंत्रों को गहराई से बदल दिया—ठीक उसी युगांतकारी अंतराल में जब गैर-पक्षी डायनासोर पृथ्वी से लुप्त होने वाले थे।
आरंभिक क्रेटेशियस के उत्तरार्ध, लगभग 11–10.5 करोड़ वर्ष पहले, दक्षिण-पूर्वी ऑस्ट्रेलिया के ओटवे–गिप्सलैंड क्षेत्र के ध्रुवीय वनों में आप छोटे, फुर्तीले शाकाहारी ऑर्निथोपोड—Leaellynasaura amicagraphica और Qantassaurus intrepidus—को फर्नों, हॉर्सटेलों और काई-जड़े गिरे हुए लट्ठों के बीच दौड़ते देखेंगे। उनके ऊपर ऊँचे पोडोकार्प और अरौकारियन शंकुधारी वृक्ष खड़े हैं, जबकि चाय-रंग की साफ धारा लंबी ग्रीष्मकालीन ध्रुवीय दिन-रौशनी को परावर्तित करती है। यह दृश्य याद दिलाता है कि क्रेटेशियस का “ध्रुवीय” संसार बर्फीला नहीं, बल्कि ठंडा-समशीतोष्ण, नम और जीवन से भरपूर था—जहाँ अपेक्षाकृत बड़ी आँखों वाले ये 1–2 मीटर लंबे डायनासोर महीनों तक चलने वाली कम-कोणीय रोशनी में सतर्कता से वन-तल पर विचरण करते थे।
उत्तर क्रेटेशियस काल के अंतिम चरण, लगभग 7 से 6.6 करोड़ वर्ष पहले, मेडागास्कर की माएवारानो संरचना के इस सूखे, धूलभरे नदी-पट में लगभग 6 मीटर लंबा एबेलिसौरिड शिकारी Majungasaurus crenatissimus हाल ही में गिरे टाइटैनोसॉर Rapetosaurus krausei के शव के पास सतर्क खड़ा है, जबकि छोटा, कवचधारी नोटोसुखियन Simosuchus clarki किनारे दबे पाँव मंडरा रहा है। दर्शक फटी हुई गाद, कैल्क्रीट-समृद्ध अवसाद, विरल अराउकारियन और पोडोकार्प जैसे शंकुधारी वृक्ष, तथा बिखरी प्रारम्भिक आवृतबीजी झाड़ियाँ देखेंगे—एक ऐसा अर्ध-शुष्क, तीव्र ऋतुचक्र वाला परिदृश्य जहाँ सूखे के बादलों से घिरा तूफ़ान क्षितिज पर उमड़ रहा है। यह दृश्य गोंडवाना के बिखरते दक्षिणी संसार की एक विशिष्ट पारिस्थितिकी को पकड़ता है, जहाँ मेडागास्कर के अलग-थलग पड़े जीवसमूहों ने विलक्षण रूप धारण किए थे।