टायर के पत्थर के घाट पर म्यूरेक्स के गोले उतारते फोनीशियन श्रमिक
लौह युग — 1,200 BCE — 500 BCE

टायर के पत्थर के घाट पर म्यूरेक्स के गोले उतारते फोनीशियन श्रमिक

टायर के इस पथरीले लेवांत तट पर फोनीकी मजदूर काँटेदार म्यूरैक्स घोंघों से भरी टोकरियाँ जहाज़ से उतारते दिखाई देते हैं, जबकि पास ही चूना-पत्थर और मिट्टी-ईंट के गोदामों के सामने बैंगनी रंग से सने खोलों के ढेर और नमकीन पानी की धारियाँ फैली हैं। 8वीं–7वीं शताब्दी ईसा पूर्व में टायर भूमध्यसागर के सबसे महत्वपूर्ण फोनीकी बंदरगाहों में था, और यही म्यूरैक्स से निकाला गया प्रसिद्ध टायरियन पर्पल रंग राजसत्ता, वैभव और दूरगामी समुद्री व्यापार का प्रतीक बन गया। मुड़े हुए चौकोर पाल और दो पतवारों वाला देवदार-लकड़ी का व्यापारी पोत इस बात की याद दिलाता है कि ऐसी दुर्गंधयुक्त तटीय कार्यशालाएँ ही उस समुद्री नेटवर्क की धड़कन थीं जिसने फोनीकी संसार को साइप्रस, मिस्र, यूनान और पश्चिमी भूमध्यसागर से जोड़ा।

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