अमूर नदी पर विशाल कलुगा स्टर्जन पकड़ते नानाई मछुआरे
विश्व युद्ध — 1914 — 1945

अमूर नदी पर विशाल कलुगा स्टर्जन पकड़ते नानाई मछुआरे

1930 के दशक के इस दृश्य में, रूसी सुदूर पूर्व के ननाई मछुआरे अमूर नदी के बर्फीले पानी से एक विशाल कलुगा स्टर्जन को अपनी पारंपरिक लकड़ी की नाव में खींचने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इन मछुआरों ने मछली की खाल से बने जलरोधी 'तेतुए' (tetue) कोट पहने हैं, जो साइबेरिया की कठोर जलवायु में जीवित रहने के लिए स्वदेशी नवाचार का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। वसंत के पिघलते बर्फ (ledokhod) के बीच की गई यह मशक्कत न केवल उनके साहस को दर्शाती है, बल्कि सदियों पुरानी शिकार परंपराओं और प्रकृति के साथ उनके गहरे संबंध को भी उजागर करती है।

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