नालंदा विश्वविद्यालय में बौद्ध विद्वानों की बहस
प्रारंभिक मध्य युग — 500 — 1000

नालंदा विश्वविद्यालय में बौद्ध विद्वानों की बहस

सातवीं शताब्दी के नालंदा विश्वविद्यालय के इस जीवंत दृश्य में, केसरिया और गेरुआ वस्त्रों में सजे बौद्ध भिक्षु लाल ईंटों के प्रांगण में ताड़ के पत्तों की पांडुलिपियों के साथ गहन शास्त्रार्थ में लीन दिखाई देते हैं। भव्य सारिपुत्र स्तूप की छाया तले आयोजित यह सभा प्राचीन भारत की समृद्ध बौद्धिक परंपरा और उच्च शिक्षा के वैश्विक केंद्र के रूप में मगध की ऐतिहासिक भूमिका को दर्शाती है। धूप से सराबोर यह प्रांगण उस काल की उत्कृष्ट वास्तुकला और तर्क-वितर्क की उस संस्कृति का प्रतीक है जिसने सदियों तक पूरे एशिया के ज्ञान-विज्ञान को प्रभावित किया।

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